Thursday, 2nd September 2010.

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Posted on शनिवार, 25th अप्रैल 2009 by जी.के. अवधिया


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इस विधि में सबसे पहले एक स्क्वीज पेज (squeeze page) बनाया जाता है जिसमें कि आप अपने प्रोडक्ट, जिसे प्रोडक्ट को प्रमोट कर रहे हैं, के विषय में उसके गुण दोष बताते हुये एक अच्छा सा विस्तृत लेख लिखते हैं। लेख में बताया जाता है कि आपके प्रोडक्ट को खरीदने से क्या क्या फायदे हैं, उसे क्यों खरीदना चाहिये आदि। लैंडिंग पेज बनाने के लिये आप ब्लोगर, वर्डप्रेस, स्क्विडू, हबपेज जैसे मुफ्त प्लेटफॉर्म का प्रयोग कर सकते हैं या फिर स्वयं के होस्टिंग तथा डोमेननेम का प्रयोग कर सकते हैं। स्क्वीज पेज में लेख के आरम्भ, मध्य तथा अन्त में आपके प्रोडक्ट के लैंडिंग पेज (landing page), अर्थात् जहाँ पर वह बेचा जा रहा है, का लिंक दिया जाता है। आपके लेख से प्रभावित होकर आपके स्क्वीज पेज में आने वाला, जो कि आपका सम्भावित ग्राहक (potential customer) होता है, प्रोडक्ट के लैंडिंग पेज में चला जाता है जहाँ पर हो सकता है कि वह आपके प्रोडक्ट को खरीद ले।

स्क्वीज पेज बन जाने के बाद समस्या यह होती है कि उसे लोग जानेंगे कैसे? इसके लिये आर्टिकल मार्केटिंग का प्रयोग किया जाता है। आर्टिकल मार्केटिंग करने के लिये अब आप अपने प्रोडक्ट के निशे अर्थात् विषय में कम से कम पाँच और अधिक से अधिक दस, पन्द्रह मतलब कि जितना अधिक हो सके आर्टिकल्स लिखते हैं और उन आर्टिकल्स को ईजाइनआर्टिकल्स.कॉम में सबमिट कर देते हैं। ईजाइनआर्टिकल्स.कॉम विश्व की सबसे अधिक लोकप्रिय आर्टिकल डायरेक्टरी है और वहाँ पर प्रतिदिन करोड़ों की संख्या में लोग अपने मनपसंद लेख पढ़ने के लिये आते हैं। ईजाइनआर्टिकल्स.कॉम के अलावा और भी हजारों आर्टिकल डायरेक्टरीज हैं जिनमें से आप को जितने अधिक में हो सके अपने इन आर्टिकल्स को सबमिट करना होगा किन्तु अभी नहीं, ईजाइनआर्टिकल्स.कॉम में उन लेखों को स्वीकृत और प्रकाशित हो जाने के बाद क्योंकि ईजाइनआर्टिकल्स.कॉम पहले से ही किसी अन्य आर्टिकल डायरेक्टरी में प्रकाशित किसी भी लेख को स्वीकृति प्रदान नहीं करता। लेख सबमिट करते समय अपने रिसोर्स बॉक्स में आप अपने स्कवीज पेज का उल्लेख करते हुये उसका लिंक दे देते हैं। तो ईजाइनआर्टिकल्स.कॉम में आपके लेख प्रकाशित हो जाने के बाद अब आप अपने उन लेखों को अन्य सैकड़ों आर्टिकल डायरेक्टरीज में सबमिट कर दीजिये। इस तरह से आपके सारे लेख इंटरनेट में फैल जाते हैं और उन्हें पढ़कर प्रभावित होने वाले लोग आपके रिसोर्स बाक्स के माध्यम से आपके स्क्वीज पेज में आते हैं जहाँ से वे आपके प्रोडक्ट के लैंडिंग पेज में जाकर आपका प्रोडक्ट खरीद सकते हैं।

शायद आपको ये सब करना बहुत बड़ा पचड़ा लगे किन्तु यदि इंटरनेट से कमाई करना है तो इतना परिश्रम तो करना ही होगा। वैसे यदि आप कुछ रकम अपने जेब से खर्च कर सकते हैं तो आपको आपकी रकम के बदले लेख लिख कर देने वाले घोस्ट राइटर्स की भी कमी नहीं है।

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Posted in आमदनी, आर्टिकल मार्केटिंग (Article Marketing), एफिलियेट प्रोग्राम्स (Affiliate Programs), कमाई के तरीके | Comments (27)

Posted on बुधवार, 22nd अप्रैल 2009 by जी.के. अवधिया

नेट से कमाई करने के लिये सबसे पहला काम है ऐसे लोगों को खोजना जो कि आपके प्रोडक्ट को खरीदें। आपने देखा होगा कि किसी दूकान में आने वाले सभी लोग ग्राहक नहीं होते, जितने लोग वहाँ आते हैं उनमें से कुछ ही ग्राहक बनते हैं। कुछ लोगों को आपका सामान पसंद नहीं आता तो कुछ लोग आपके व्यवहार को नापसंद कर के वापस चले जाते हैं। तो कहने का मतलब है कि आपकी दूकान में आने वाले सिर्फ संभावित ग्राहक (potential customers) होते हैं वास्तविक ग्राहक (real customers) तो उनमें से कुछ प्रतिशत लोग ही बनते हैं। मान लीजिये कि अब यदि आपके दूकान में आने वाले संभावित ग्राहकों में से केवल दो प्रतिशत लोग ही वास्तविक ग्राहक बन पाते हैं तो इसका मतलब यह हुआ कि पचास लोगों के आने के बाद ही एक प्रोडक्ट बिकेगा। तो यदि आपकी दूकान में प्रतिदिन मात्र दस लोग ही आते हैं तो एक प्रोडक्ट बिकने में पाँच दिन लगेंगे। किन्तु यदि आपकी दूकान में प्रतिदिन सौ लोग आते हैं तो एक ही दिन में आपके दो प्रोडक्ट बिक सकते हैं। एक दिन में यदि हजार लोग आपके ब्लोग यानी कि आनलाइन दूकान में आते हैं तो एक दिन में बीस प्रोडक्ट्स बिक जायेंगे। अर्थात् दूकान में जितने अधिक लोग आयेंगे बिक्री उतनी ही अधिक होगी।

अब यह तो आप जानते ही हैं कि आपका ब्लोग ही आपकी दूकान है पर अपने ब्लोग में आने वालों की संख्या बढ़ाना बहुत ही कठिन काम होता है और इस कठिनाई का सामना करने के लिये हम तत्पर भी हो जायें तो भी इस काम में महीनों से सालों का समय लगने की सम्भावना होती है। तो अब समस्या यह है कि हम अपना सामान बेचने के लिये ग्राहक कहाँ से पायें? निराश होने की आवश्यकता नहीं है, आप अपने ब्लोग के प्रसार प्रचार तो करते ही रहिये किन्तु इस बीच उन साइट्स के ट्रैफिक का भी फायदा उठाने का हर सम्भव प्रयास करें जहाँ पर कि रोजाना विश्व भर से करोड़ों लोग आते रहते हैं, ऐसे साइट्स के उदाहरण हैं यूट्यूब.कॉम, फेसबुक.कॉम, ट्विटर.कॉम आदि। यदि आप इन साइट्स के ट्रैफिक का फायदा उठाने की जुगत कर लेते हैं तो आपका प्रोडक्ट धड़ल्ले के साथ बिकना शुरू हो जायेगा। इसे आप इस तरह से समझ सकते हैं कि आपने अपनी एक दूकान किसी मेले में भी खोल लिया है।

आज के अपने इस पोस्ट में मैं आपको ट्विटर.कॉम के ट्रैफिक से फायदा उठाने के विषय में बताउंगा। यह तो आप जानते ही हैं कि ट्विटर एक अत्यधिक लोकप्रिय साइट है और वहाँ पर संसार भर से करोड़ों लोग रोज आते हैं। ट्विटर की सहायता से आप अपने दोस्तों, परिजनों, प्रसंशकों आदि को अपना संदेश, जिन्हें कि ट्वीट्स कहा जाता है, आसानी के साथ भेज सकते हैं। इन संदेशों को लिखने के लिये अधिकतम  कैरेक्टर्स का ही प्रयोग किया जा सकता है। ट्विटर में आप अन्य लोगों को फॉलो कर सकते हैं और अन्य लोग आपको फॉलो कर सकते हैं। आप जिन्हें फॉलो कर रहे होते हैं वे लोग जब भी कोई नया ट्वीट अपडेट करते हैं तो आपको वे ट्वीट्स स्वयमेव ही मिल जाते हैं। इसी प्रकार आप जब कोई ट्वीट अपडेट करते हैं तो आपका ट्वीट उन समस्त लोगों को मिलता है जो कि आपको फॉलो कर रहे होते हैं। यह कोई जरूरी नहीं है कि आप जिन्हें फॉलो कर रहे हैं वे भी फॉलो करें और जो आपको फॉलो कर रहे हैं उन्हें आप भी फॉलो करें। किन्तु स्वाभाविक रूप से ऐसा होता है कि जिन लोगों को आप फॉलो करने लगते हैं उनमें से लगभग आधे से भी अधिक लोग भी आपको फॉलो करना पसंद करते हैं। तो आप अन्य लोगों को फॉलो कर के अपने फॉलोवर्स की संख्या बढ़ा सकते हैं। जितने अधिक आपके फॉलोवर्स होंगे उतने ही लोगों को आपका संदेश जायेगा। तो आपको अपने फॉलोवर्स की संख्या को जितना अधिक हो सके उतना अधिक अर्थात् अधिक से अधिक बढ़ाना है। फिलहाल ट्विटर में मेरे फॉलोवर्स  से भी अधिक हैं और मैं इस संख्या को और भी अधिक से अधिक बढ़ाने में लगा हूँ। मेरा ट्विटर प्रोफाइल आप यहाँ देख सकते हैं - http://twitter.com/gk_awadhiya

अब ट्विटर में अपना सामान बेचने के लिये सबसे पहले कुछ और बातों को समझ लीजिये। शुरुवात में आप सिर्फ ऐसे ट्वीट्स लिखें जो कि लोगों को कुछ महत्वपूर्ण जानकारी दे। अपना सामान बेचने के लिये किसी प्रकार का ट्वीट भूलकर भी शुरू शुरू में कदापि न भेजें। अब आपके ट्वीट्स में महत्वपूर्ण जानकारियाँ होंगी और अच्छी बातें होंगी तो स्वाभाविक रूप से आपके फॉलोवर्स बढ़ते जायेंगे। दस पन्द्रह दिनों के बाद आप अपने ब्लोग या वेबपेज में एक पोस्ट लिखें जिसमें कि उस वस्तु के फायदे के विषय में जानकारी दें जिसे कि आप प्रमोट कर रहे या बेच रहे हैं। अब अपने अन्य जानकारीयुक्त ट्वीट्स भेजने के साथ ही साथ दिन में एकाध बार अपने उस ब्लोग पोस्ट से सम्बन्धित ट्वीट भी भेजें। याद रखें कि दिन में एक या अधिक से अधिक दो बार ही, लोगों को ऐसा न लगने लगे कि आप यहाँ सिर्फ अपना सामान बेचने के लिये ही हैं। याद रखें कि आपको जानकारीयुक्त महत्वपूर्ण ट्वीट्स ही ज्यादातर भेजेने हैं ताकि लोग को यही समझें कि महत्वपूर्ण जानकारियाँ प्राप्त करने के लिये उन्हें आपका फॉलोवर बने रहना अत्यावश्यक है। वैसे भी ट्विटर में आपका मुख्य उद्देश्य लोगों को जानकारी देना तथा उनकी सहायता करना ही होना चाहिये। और याद रखिये कि अपने सामान बेचने वाले ट्वीट में भी आप उन्हें यह बताने का प्रयास करें कि आप उन्हें एक अच्छी वस्तु बेच कर उनकी सहायता ही कर रहे हैं। यह भी स्मरण रखिये कि लोगों के लिये समस्या निदान अधिक महत्वपूर्ण होता है, यदि आपके सामान को खरीद कर उनकी समस्या सुलझती है तो वे कभी भी रुपये का मुँह नहीं देखेंगे और अच्छी खासी कीमत में आपका सामान खरीद लेंगे। आप स्वयं सोचिये कि आपको रेल से अकस्मात यात्रा करनी पड़ जाये तो आप सिर्फ एक बर्थ रिजर्वेशन के लिये कितनी भी रकम खर्च कर देने के लिये तैयार हो जाते हैं। और अधिक पैसे देने के बाद भी यदि रिजर्व्हेशन मिल जाये तो आपके मन में यह विचार नहीं आता कि सामने वाले ने आपसे अधिक पैसे लिये बल्कि आप स्वयं को सामने वाले का अहसानमंद भी समझने लगते हैं। तो आपको अपने ट्वीट याने कि संदेश में यही बताना है कि आप अपना सामान बेच कर खरीदने वाले की सहायता ही कर रहे हैं।

तो शुरू कर दीजिये ट्विटर में धड़ल्ले के साथ अपने फॉलोवर्स बनाने का अभियान। ट्विटर में आपका खाता तो है ना? यदि नहीं है तो तत्काल यहाँ क्लिक करके अपने मुफ्त ट्विटर खाता खोल लें।

अन्त में कुछ महत्वपूर्ण टिप्स

हमेशा जानकारीयुक्त, रोचक तथा मजेदार ट्वीट्स भेजने का प्रयास करें। ट्विटर में आपको व्यक्तिगत रूप से कोई नहीं जानता, लोग यदि कुछ जानते हैं तो केवल आपके ट्वीट्स को। आपके ट्वीट्स ही वहाँ पर आपकी पहचान है।

प्रायव्हेट मेसेजेस का जवाब अवश्य दें। फॉलोवर बनने के लिये धन्यवाद वाले डायरेक्ट मेसेजेस के जवाब देने की कोई आवश्यकता नहीं है किन्तु यदि किसी ने अने डायरेक्ट मेसेज में किसी प्रकार का प्रश्न किया है और यदि आपको उसके प्रश्न का उत्तर मालूम है तो उसे अवश्य ही जवाब दें। डायरेक्ट मेसेजेस का जवाब देने से सामने वाले की नजर में आपका महत्व तो बढ़ता ही है साथ ही साथ उसका आपके साथ निजी सम्बन्ध भी बढ़ता है। तो अपने सम्बन्ध अवश्य ही बढ़ायें। कौन जाने आप जिससे अपना निजी सम्बन्ध बना रहे हैं वह आपका ग्राहक ही हो।

अपने ट्वीट्स में सदैव नम्र भाषा का प्रयोग करें। सामने वाले को महत्व देने वाली बातें लिखें। कटु शब्द तो कभी भूलकर भी कदापि न लिखें।

एक दिन में हजारों लोगों को फॉलो करने का प्रयास कदापि न करें क्योंकि ऐसा करने से ट्वीट्स के संचालकों को परेशानी हो सकती है और वे आपकी सदस्यता निरस्त भी कर सकते हैं। एक दिन में दो से तीन सौ लोगों को ही फॉलो करें। आप स्वयं देखेंगे कि जितने लोगों को आप फॉलो करते हैं उनमें से आधे अधिक लोग आपको भी फॉलो करना आरम्भ कर देते हैं।

अन्त में मैं एक बार फिर से दुहरा दूँ कि अपना सामान बेचने वाले ट्वीट्स कम से कम और सोच समझ कर भेजें।

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Posted on सोमवार, 20th अप्रैल 2009 by जी.के. अवधिया

फिलहाल हिन्दी भाषा से कमाई का प्रावधान नहीं है किन्तु बहुत ही जल्दी हो जायेगा। यदि आप को अंग्रेजी की जानकारी है और अंग्रेजी में अच्छे लेख लिख सकते हैं तो निम्न तरीकों से कमाई की जा सकती हैः

पीपीसी विज्ञापन (3)

एडसेंस (Adsense): अपने ब्लोग में गूगल एडसेंस के विज्ञापन दिखा कर कमाई की जा सकती है।

एडब्राइट (Adbrite): यह भी एडसेंस जैसा ही प्रोग्राम है जो कि आपके ब्लोग में टैक्स्ट एड्स दिखाने की व्यवस्था करता है और विज्ञापन पर क्लिक होने पर कमाई होती है।

बिडव्हर्टाइजर (BidVertizer): एक अन्य पीपीसी प्रोग्राम जिसमें मिनिमम पेआउट रकम मात्र $10 है अर्थात् आपके खाते में $10 जमा हो जाने पर आप भुगतान प्राप्त कर सकते हैं।

(याद रखें कि एक ब्लोग में एक प्रकार का ही पीपीसी विज्ञापन दिखाये जा सकते हैं एक से अधिक प्रकार के नहीं। मतलब यह कि यदि आप अपने ब्लोग में एडसेंस के विज्ञापन दिखा रहे हैं तो उसी ब्लोग में एडब्राइट का विज्ञापन नहीं दिखा सकते, हाँ एडब्राइट के विज्ञापन दिखाने के लिये आप एक दूसरा ब्लोग बना सकते हैं पर उस दूसरे ब्लोग में एडसेंस के विज्ञापन नहीं हो सकते सिर्फ एडब्राइट के ही विज्ञापने दिखाये जा सकते हैं।)

मारकेटप्लेसेस (2)

ईबे (E-bay): इबे एक बहुत बड़ा मारकेटप्लेस है और यहाँ पर आप कुछ भी सामान बेच कर मुनाफा कमा सकते हैं।

अमेजान (Amezon): सेलर यह भी ईबे के जैसा मारकेटप्लेस है जहाँ आप अपने सामान बेच सकते हैं।

एफिलिएट प्रोग्राम्स (6)

डीजीएमप्रो (DGMPro): विशेष रूप से भारत के लिये बनाया गया एफिलिएट नेटवर्क।

क्लिकबैंक (Clickbank): क्लिकबैंक सबसे अधिक लोकप्रिय एफिलिएट नेटवर्क है जिसमें बेचने के लिये बहुत सारे डिजिटल प्रोडक्ट्स उपलब्ध हैं जिन्हें बेच कर मोटा कमीशन कमाया जा सकता है।

पेडाटकॉम.कॉम (PayDotCom.com): यह भी क्लिकबैंक जैसा ही एफिलिएट नेटवर्क है जहाँ पर बेचने के लिये बहुत सारे डिजिटल उत्पाद उपलब्ध हैं।

अमेजान एफिलिएट प्रोग्राम (Amezon Affiliate Program): भौतिक वस्तुएँ बेचकर कमीशन कमाने का सर्वाधिक लोकप्रिय एफिलिएट नेटवर्क।

कमीशन जंक्शन (Commission Junction): अमेजान के जैसा ही एफिलिएट नेटवर्क।

कैफेप्रेस (CafePress): एक और अमेजान के जैसा ही एफिलिएट नेटवर्क।

यहाँ पर मैंने एजूगले, चिटिका आदि तरीकों के उल्लेख को छोड़ दिया है क्योंकि अभी वे भारत में क्रियाशील नहीं हैं। इनके अलावा भी अन्य कई तरीके हैं किन्तु कमाई के उपरोक्त तरीके अधिक लोकप्रिय हैं।

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Posted in आमदनी, एफिलियेट प्रोग्राम्स (Affiliate Programs), कमाई के तरीके, पे पर क्लिक (PPC) | Comments (10)

Posted on रविवार, 19th अप्रैल 2009 by जी.के. अवधिया

यदि कोई इंटरनेट से कमाई करने की बात सोचता है तो सबसे अधिक लुभाने वाली ची है एफिलिएट प्रोग्राम्स। एफिलिएट प्रोग्राम्स नये लोगों के लिये सबसे बड़ा आकर्षण का विषय होता है क्योंकि एफिलिएट बनने के लिये कुछ भी खर्च नहीं करना होता, आप बिल्कुल मुफ्त में किसी भी एफिलिएट प्रोडक्ट के एफिलिएट बन सकते हैं। और बताया भी यह जाता है कि एफिलिएट बन कर डालर या रुपया कमाना चुटकी बजाने जैसा सरल काम है। आपके दिमाग में अच्छी तरह से बिठा दिया जाता है कि आपको सिर्फ अपने वेबपेज या ब्लोग में एफिलिएट प्रोडक्ट का बैनर या लिंक लगाना है और डालर की बरसात शुरू हो जायेगी। अब ऐसा कहने वाले का क्या जाता है? उसे तो अपने प्रोडक्ट दूसरे लोगों के जरिये बिकवाना है। हम और आप जैसे कई हजार लोग उसकी बातों में आकर एफिलियेट साइन अप कर लेते हैं और अपने जगह जगह उसके बैनर तथा लिंक लगाना शुरू कर देते हैं। साथ ही इंतजार करने लगते हैं डालर के बरसात की किन्तु परिणाम होता है टाँय टाँय फिस्स।

अब जरा इस बात पर विचार करें कि सामने वाला क्यों आपको सपने दिखाता है? सीधा सा कारण है कि उसकी बातों में आकर यदि 10000 लोग उसके एफिलिएट बन गये तो उनमें से कम से कम 1% यानी कि 100 लोग येन-केन-प्रकारेण उसके प्रोडक्ट को बेचने में सफल हो ही जाते हैं और उसका प्रोडक्ट बिकना जारी रहता है। यदि आप उसका प्रोडक्ट नहीं बेच पाये और आपको जो सपना दिखाया गया है वह चूर चूर हो गया, आप निराशा में डूब गये, आप स्वयं को दुखी अनुभव करने लगे तो इन बातों से सपने दिखाने वाले को कोई फर्क नहीं पड़ता। फर्क पड़ता है तो सिर्फ आपको। अन्त में असफल और निराश होकर आप सोचने लगते हैं कि एफिलिएट प्रोग्राम्स से कभी कमाई की ही नहीं जा सकती और आप उसे छोड़ देते हैं।

आइये अब विचार करें कि अधिकतर लोग एफिलिएट मार्केटिंग में असफल क्यों होते हैं। वास्तव में बहुत से लोग एफिलिएट मार्केटिंग करना तो चाहते हैं पर उन्हें पता नहीं होता कि एफिलिएट प्रोग्राम्स आखिर हैं क्या और कैसे काम करते हैं। कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो इस विषय में जानते तो हैं फिर भी असफल रहते हैं। पर वे लोग कभी भी विश्लेषण करने का प्रयास नहीं करते कि क्यों उन्हें असफलता मिली।

तो आइये कुछ एफिलिएट मार्केटिंग के कुछ बिंदुओं पर विचार करें.

एफिलिएट प्रोग्राम जॉयन करना बहुत सरल है क्योंकि सिर्फ मुफ्त रजिस्ट्रेशन ही करना पड़ता है।
किन्तु एफिलिएट मार्केटिंग में सफलता प्राप्त करना बहुत कठिन है।
कभी भी यह न सोचें कि बिना परिश्रम के सरलता के साथ कमाई की जा सकती है।
पहले आपको समझना होगा कि एफिलिएट प्रोग्राम्स कैसे काम करते हैं।
फिर आपको उसमें सफल होने के लिये कड़ी मेहनत करनी होगी। आपनें अपने काम के प्रति समर्पण की भावना और दृढ़ निश्चय का होना निहायत जरूरी है।
एफिलिएट प्रोग्राम्स के द्वारा अच्छी खासी आमदनी करने में आपको महीनों, यहाँ तक कि सालों भी, लग सकते हैं। हो सकता है कि सफलता न भी मिले क्योंकि आप एक व्यापार करने जा रहे हैं और व्यापार में कभी कभी असफलता भी हाथ लगती है।
मेरा आशय आपको हतोस्हाहित करने का कदापि नहीं है बल्कि मैं तो आपको सत्य से अवगत कराना चाहता हूँ ताकि आप इस व्यापार में आने से पहले पूरी पूरी तैयारी कर लें और सही मानसिकता बना लें।

सफल एफिलिएट बनने के लिये कुछ टिप्सः

  • शुरुवात करने के पहले पर्याप्त जानकारी अवश्य प्राप्त करें।
  • अनुभवी लोगों के अनुभवों से लाभ उठाने का प्रयास करें।
  • सतत् प्रयत्नशील रहें।
  • उन्हीं एफिलिएट प्रोग्राम्स को प्रमोट करें जिन्हें कि आप अपने लिये उचित समझते हैं।
  • अनेक प्रकार के परीक्षण करते रहें और जो विधि काम कर जाये उसी का प्रयोग करें।

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Posted on शुक्रवार, 17th अप्रैल 2009 by जी.के. अवधिया

एफिलिएट प्रोग्राम्स (affiliate programs) क्या होते हैं?

इंटरनेट के किसी व्यापारी के उत्पाद (product) या (services) सेवाओं को बढ़ावा (promote) देकर आमदनी प्राप्त करने को एफिलियेट या एसोसियेट प्रोग्राम (affiliate program or associate program) कहते हैं। ऐसा भी समझा जा सकता है कि एफिलियेट बन कर आप किसी इंटरनेट व्यापारी के डिस्ट्रीब्यूटर बन गये। किन्तु एफिलियेट और डिस्ट्रीब्यूटर में बहुत फर्क है। डिस्ट्रीब्यूटर को गोदाम बनाने, सुरक्षा निधि जमा करने, मुख्य व्यापारी द्वारा भेजे गये माल के रख-रखाव आदि में बहुत बड़ी पूंजी फँसाना पड़ता है किन्तु इंटरनेट में आपको इस प्रकार का कोई झंझट मोल नहीं लेना पड़ता। इंटरनेट में तो केवल आपको संभावी ग्राहक (potential customer) को व्यापारी के वेबसाइट में भेजना होता है। फिर यदि संभावी ग्राहक सामान खरीद कर वास्तविक ग्राहक बन जाता है तो आपका कमीशन पक्का हो गया।

एफिलियेट प्रोग्राम की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि कोई दूसरा व्यक्‍ति उत्पाद बनाता है, उसे बेचने के लिये वेबसाइट बनाता है, आपको विज्ञापन सामग्री स्वयं प्रदान करता है, ग्राहक से लेन-देन भी स्वयं करता है और असंतुष्ट ग्राहक को समझाना या उसका पैसा वापस करना आदि भी उसी का सरदर्द होता है। आपका ग्राहक से किसी प्रकार से भी सीधा सम्बंध नहीं होता, यहाँ तक कि ग्राहक आपको जानता तक नहीं। इसके बाद भी आपको आपका कमीशन मिलते रहता है।

एफिलियेट प्रोग्राम का आरम्भ सबसे पहले अमेजान डाट काम (amazon.com) ने एसोसियेट प्रोग्राम के नाम से सन् 1996 में किया था। उसकी सफलता से प्रभावित होकर बाद में कमीशन जंक्शन (commission junction), क्लिक बैंक (Click Bank), 5 पिलार (5 Pillar), जेन फिट (Gen Fit), मारकेटिंग टिप्स (Marketing Tips), माई मारकेटिंग सेंटर (My Marketing Center) आदि अनेक वेबसाइटों ने भी अपना एफिलियेट कार्यक्रम शुरू कर दिया। आज तो इंटरनेट के प्रायः सभी व्यापारी का अपना एफिलियेट कार्यक्रम हो गया है।

एक बार किसी इंटरनेट व्यापारी के एफिलियेट बन जाने के बाद आपको उसके उत्पाद तथा वेबसाइट का प्रचार-प्रसार ही करना होता है। प्रचार-प्रसार कैसे करना है उसका प्रभावी तरीका भी वे स्वंय आपको सुझाते हैं तथा उसके लिये वे समस्त सामग्री भी वे ही आपको मुफ्त में प्रदान करते हैं।

किन्तु आपको हमेशा ये बात ध्यान में रखना होगा कि केवल एफिलियेट बन जाने से आमदनी होना शुरू नहीं हो जाता, इसके लिये कठिन परिश्रम करना पड़ता है। बिना परिश्रम किये किसी प्रकार की आमदनी हो ही नहीं सकती।

एफिलियेट प्रोडक्ट्स को प्रमोट करने के विभिन्न तरीकों के विषय में बाद के पोस्ट्स में जानकारियाँ मिलेंगी।

मेरे इस ब्लोग में पधारने के लिये आपका धन्यवाद!

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Posted on शनिवार, 11th अप्रैल 2009 by जी.के. अवधिया

पे पर क्लिक (PPC) विज्ञापन क्या हैं?

PPC (Pay Per Click) याने कि “पे पर क्लिक” वे विज्ञापन होते हैं जिन पर यदि कोई व्यक्ति क्लिक करे तो विज्ञापनदाता विज्ञापन कंपनी को क्लिक के एवज में कीमत प्रदान करती हैं। PPC विज्ञापनों की बहुत सारी कंपनियाँ हैं जैसे कि गूगल, याहू, एडब्राइट

ये सारी कंपनियाँ विज्ञापनदाताओं से विज्ञापन प्राप्त करके उन विज्ञापनों को इंटरनेट के करोड़ों वेबसाइट्स और ब्लोग्स में फैला देती हैं। जब उन विज्ञापनों पर क्लिक होता है तो ही विज्ञापनदाता विज्ञापन कंपनी को उस क्लिक की कीमत चुकाती हैं। विज्ञापन कंपनियाँ विज्ञापनदाता से मिलने वाली रकम का एक छोटा सा हिस्सा उस व्यक्ति को देता है जिसके वेबपेज या ब्लोग से विज्ञापन पर क्लिक किया गया था। इसे आप इस तरह से समझिये कि आपका परिचित कोई कपड़ा व्यापारी आपको सिर्फ उसकी दुकान में किसी ऐसे व्यक्ति को, जो कि कपड़े खरीदने की लिये घर से निकला है, भेज देने के लिये छोटी सी रकम का भुगतान करता है। इसके पीछे स्पष्ट कारण है आपके द्वारा भेजा गया व्यक्ति उसका सम्भावित ग्राहक हो सकता है।

आज हम यहाँ पर संसार की सबसे बड़ी और सफल आनलाइन विज्ञापन कंपनी गूगल और उसकी कार्य प्रणाली पर चर्चा करेंगे।

गूगल क्या है?

गूगल संसार की सबसे बड़ी आनलाइन विज्ञापन कंपनी है जिसे विश्व के प्रायः समस्त देशों से विज्ञापन मिलते हैं और वह उन विज्ञापनों को इंटरनेट के अरबों करोड़ों ब्लोग्स और वेबपेजेस में फैला देती है। जब भी उन विज्ञापनों पर क्लिक होता है, गूगल को अपने विज्ञापनदाता से उस क्लिक की कीमत मिलती है जिसका कि एक छोटा सा हिस्सा गूगल उस ब्लोगर या वेबमास्टर को भी देता है जिसके ब्लोग या वेबपेज से विज्ञापन पर क्लिक किया गया था।

गूगल की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि वह अपने विज्ञापनदाताओं के पास सही सम्भावित ग्राहक भेजती है। यदि किसी कपड़ा खरीदने की इच्छा रखने वाले व्यक्ति को फर्नीचर दुकान में भेज दिया जाये तो वह व्यक्ति उस फर्नीचर दुकान का सम्भावित ग्राहक हो ही नहीं सकता क्योंकि वर्तमान में उसे कपड़े खरीदने की आवश्यकता है फर्नीचर की नहीं। गूगल इस बात का पूरा पूरा ध्यान रखता है। गूगल का बोट प्रत्येक ब्लोग या वेबपेज की सामग्री को पढ़कर समझ जाता है कि उसका सम्बंध किस चीज से है और उसके बाद गूगल को मिले असंख्य विज्ञापनों में से छाँट कर केवल उन्हीं विज्ञापनों को उस ब्लोग या वेबपेज में भेजता है जो कि उससे से संबंधित हों। याने कि आपका ब्लोग यदि वाद्ययंत्रों के सम्बंध में है तो गूगल उसमें वाद्ययंत्र बेचने वालों के विज्ञापनों को ही दिखायेगा, किसी फर्नीचर बेचने वाले का विज्ञापन वहाँ कभी भी नहीं दिखेगा। कारण है कि आपके ब्लोग को पढ़ने के लिये वे लोग ही आते हैं जिन्हें कि वाद्ययंत्रों में रुचि है और वह भी सर्च इंजिन के द्वारा आपके ब्लोग को खोज कर। ऐसे लोग यदि आपके ब्लोग के वाद्ययंत्र से सम्बंधित किसी विज्ञापन को क्लिक करके यदि विज्ञापनदाता के वेबसाइट, जो कि उसका आनलाइन दूकान होता है, में पहुँच जाता है तो इस बात की बहुत अधिक सम्भावना है कि वह वहाँ से कोई वाद्ययंत्र खरीद ले। गूगल के इस प्रकार के विज्ञापन को “एडसेंस फॉर कान्टेन्ट” कहते हैं।

हिन्दी भाषा का एडसेंस सपोर्टिंग लिस्ट में न होने के कारण ही हिन्दी एडसेंस विज्ञापनों से वंचित है किन्तु गूगल ने हाल ही में “इंटरेस्ट बेस्ड एड्स” नामक एक नये प्रकार के विज्ञापन शुरू करने की घोषणा की है। इस नये विज्ञापन का आधार वेबपेज अथवा ब्लोग में प्रकाशित सामग्री न हो कर उस वेबपेज अथवा ब्लोग में आने वाले लोगों की रुचि है, मतलब यह कि इन विज्ञापनों का प्रकाशित सामग्री से किसी भी प्रकार का सम्बन्ध नहीं है। इसलिये उम्मीद है कि बहुत जल्दी ही हिन्दी के वेबपेजेस तथा ब्लोग्स में गूगल के “इंटरेस्ट बेस्ड एड्स” एडसेंस विज्ञापन आने शुरू हो जायेंगे।

गूगल की कार्यप्रणाली के दो भाग हैं पहला एडवर्ड्स और दूसरा एडसेंस। एडवर्ड्स के द्वारा गूगल विज्ञापनदाताओं से विज्ञापन लेता है और एडसेंस के द्वारा उन विज्ञापनों को संसार भर के ब्लोग्स और वेबसाइट्स में फैलाता है ताकि लोग उन विज्ञापनों को जान सकें। तो अब आप समझ ही गये होंगे कि आपकी कमाई फिलहाल एडसेंस से ही होने वाली है एडवर्ड्स से आपकी कमाई तब होगी जब आगे चल कर एक आनलाइन व्यापारी बन जायेंगे और एडर्ड्स के माध्यम से विज्ञापन दे कर अधिक से अधिक ग्राहकों को अपना माल बेचकर कमाई करेंगे।

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Posted in आमदनी, पे पर क्लिक (PPC) | Comments (7)

Posted on बुधवार, 8th अप्रैल 2009 by जी.के. अवधिया

इंटरनेट मारकेटिंग एक इंडस्ट्री है और विश्वास मानिये कि इससे आमदनी अवश्य ही की जा सकती है। पर इसके लिये जानकारी, अनुभव और कठिन परिश्रम अति आवश्यक है। साथ ही बहुत अधिक धैर्य की भी आवश्यकता है। यदि आप में पर्याप्त लगन, काम के प्रति समर्पण की भावना और धैर्य है और आप कड़ी मेहनत कर सकते हैं तो आप को सफल होने से इस संसार में कोई भी नहीं रोक सकता।

होता यह है कि इस धंधे में नये होने के कारण हम जानकारी प्राप्त करने के लिये इंटरनेट को खंगालते हैं और हमें जानकारी मिलती है कि इंटरनेट से आमदनी बहुत आसानी के साथ हो सकती है। यहाँ तक बताया जाता है कि आपको कुछ भी करने की आवश्यकता नहीं है या फिर यदि है तो कुछ साइट्स में सर्फ करना है, कुछ ईमेल्स को पढ़ना है या फिर इसी तरह की ऊल-जलूल अन्य बातें। अब जरा अपने विवेक को प्रयोग करके स्वयं से पूछिये कि क्या ऐसा होना सम्भव है? आपका स्वयं का उत्तर होगा कि ऐसा कभी भी नहीं हो सकता। मान के चलिये कि यदि हमारा विवेक हमसे कहे कि यह काम असम्भव है तो वास्तव में वह काम असम्भव है। बिना किसी परिश्रम के आमदनी कराने वालों से हमेशा बच कर रहिये। ये लोग केवल आपको सपने दिखा कर स्वयं कमाई करने वाले व्यक्ति हैं। बातों में उलझा कर और रंगीन सपने दिखा कर ये अवश्य ही आपसे कुछ न कुछ रकम ऐंठ लेंगे।

ऐसा नहीं है कि इंटरनेट में वास्तविक जानकारी है ही नहीं, जरूर है किन्तु बहुत कम स्थानों में और बिखरी हुई। और इन जानकारियों को ज्ञात करने के लिये बहुत खोज बीन की जरूरत पड़ती है जो कि बहुत अधिक समयखाऊ है, सालों भी लग जाते हैं। नतीजा यह होता है कि आदमी अपना धैर्य खो देता है और इस धंधे को छोड़ देता है। जल्दी जानकारी प्राप्त करने का एक तरीका यह है कि अच्छे इंटरनेट मारकेटर्स के द्वारा लिखी गई पुस्तकों को खरीद कर पढ़ना। पर इसमें भी दो कठिनाइयाँ हैं एक यह कि नया होने के कारण हमें यह पता ही नहीं होता कि किस इंटरनेट मारकेटर की पुस्तक अधिक से अधिक जानकारी देती है और दूसरा यह कि इन पुस्तकों के दाम भी इतने अधिक होते हैं कि हम अफोर्ड नहीं कर पाते।

मेरे पिछले पोस्ट की टिप्पणी में डाटा एन्ट्री के विषय में प्रश्न आया है। इसके उत्तर में मैं यही कहूँगा कि डाटा एन्ट्री के अधिकतर विज्ञापन भी सिर्फ सपने दिखा कर पैसे ऐंठने का जरिया है, यद्यपि डाटा एन्ट्री जॉब्स इंटरनेट में उपलब्ध हैं किन्तु बहुत कम क्यों कि यह एरिया सेचुरेटेड हो गया है। और एक बात तो दिमाग में पूरी तरह से बैठा लें कि डाटा एन्ट्री या सर्व्हे जॉब देने के लिये कभी भी पैसे देकर रजिस्ट्रेशन नहीं करवाना है। सोचिये कि जो हमें जॉब दे रहा है वह हमसे पैसा क्यों माँगने लगा? पैसे तो हमें उससे कमाने हैं अपनी सेवाओं के बदले। यदि आप नेट पर कुछ काम करना ही चाहते हैं तो गेटअफ्रीलांसर.कॉम में अपना मुफ्त रजिस्ट्रेशन करवा लें, शायद आपको यहाँ से कुछ मनपसंद काम मिलने की सम्भावना हो।

अन्त में मैं यह भी कह देना उचित समझता हूँ कि फिलहाल तो केवल अंग्रजी साइट्स से ही कमाई हो सकती है। हाँ इंटरनेट में हिन्दी के बढ़ते हुये वर्चस्व को ध्यान में रख कर यह अवश्य कहा जा सकता है कि एकाध दो सालों में हिन्दी से भी कमाई होने की पूर्ण सम्भावना हो जायेगी।

वैसे यदि आप थोड़ा बहुत भी अंग्रेजी में कुछ कर सकते हैं तो आपकी आमदनी की पर्याप्त सम्भावना है। बस पधारते रहिये मेरे इस ब्लोग में।

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Posted on शनिवार, 28th मार्च 2009 by जी.के. अवधिया

किसी भी कार्य को करने के लिये कहीं न कहीं से प्रेरणा मिलनी बहुत ही आवश्य है और उससे भी अधिक जरूरी है स्व-प्रेरणा (Self Motivation)। आदमी यदि स्वयं को प्रेरित नहीं करेगा तो अपने कार्य को सही ढंग से कभी भी नहीं कर पायेगा। मैं तो आपको हिन्दी ब्लोग से कमाई के लिये प्रेरित कर ही रहा हूँ किन्तु आपको भी स्वयं को प्रेरणा देनी होगी। कल की कुछ टिप्णियों से प्रतीत होता है कि बहुत से लोग प्रेरित तो अवश्य हुये हैं किन्तु अभी उन्हें पूर्ण विश्वास नहीं हुआ है कि वे अपने हिन्दी ब्लोग से कुछ कमाई कर सकेंगे। उदाहरण के तौर पर

Suresh Chiplunkar said…
वैसे तकनीकी रूप से हम बहुत कमजोर हैं, रेफ़रल लिंक, HTML आदि शब्द सुनकर ही घबरा जाते हैं… फ़िर भी देखते हैं क्या हो सकता है…

देखिये सुरेश जी, आपको लेख लिखना किसी ने सिखाया नहीं है, स्व प्रेरणा से स्वयं आपने सीखा है। तो विश्वास रखिये कि इस विधा को भी सीख ही लेंगे। फिर सहायता के लिये मैं तो हूँ ही।

दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi said…

कोशिश करते हैं। इधर से कुछ कमाई कर सकें।

दिनेशराय जी की टिप्पणी से साफ झलकता है कि जितनी आशा है उससे कहीं अधिक शंका और निराशा है (जबकि मैं अच्छी तरह से जानता हूँ कि उनमें अपने ब्लोग से कमाई कर लेने की पूर्ण गुण और योग्ताएँ हैं)।

मैं आपको बता दूँ कि किसी भी नये काम को करने में अवश्य ही बहुत सारी कठिनाइयाँ आती हैं किन्तु यदि हम ठान लें कि इस काम को करके रहेंगे तो उस कार्य को हम अवश्य ही कर सकते हैं।

“जब मानव जोर लगाता है, पत्थर पानी बन जाता है”

तो जरूरत है तो आत्म विश्वास की, स्व-प्रेरणा की। कठिनाइयों से डरना नहीं है बल्कि लड़ना है। निराशा को समाप्त करना है। नई राहें खोजनी है।

बहुत सारी कठिनाइयों में से सबसे बड़ी कठिनाई, जिसे कि विवेक रस्तोगी जी ने अपनी टिप्पणी में प्रदर्शित किया है, के विषय में मैं बाद में जिक्र करूँगा। पहले कुछ अन्य कठिनाइयों के बारे में चर्चा कर लें।

  • हमारी मानसिकताः हम में से अधिकतर लोगों ने कभी व्यापार नहीं किया है अतः हमारी मानसिकता व्यापारी वाली नहीं है। हम सोचते हैं कि कोई चीज बिक गई तो ठीक है और यदि नहीं बिकी तो भी कोई हर्ज नहीं। किन्तु व्यापार वाली मानसिकता दूसरी होती है। व्यापारी ग्राहक को अपनी चीजें खरीदने के लिये उकसाता है। आप कोई वस्तु खरीदते हैं तो उसे खरीद लेने के बाद व्यापारी अवश्य ही पूछता है और क्या दूँ? यदि आप कहते हैं कि कुछ नहीं तो वह फिर कहता है कि ये बिल्कुल नई चीज आई है देख तो लीजिये। मतलब यह कि वह आपको उकसाता है कि आप कुछ और खरीद लें। तो हमें भी इस मानसिकता को अपनाना होगा। हमारी मानसिकता एकदम से तो बदल नहीं सकती किन्तु कोशिश करने से कुछ समय के बाद इसे बदला जा सकता है।
  • हमारी छविः हमें ऐसा लगता है कि हमारी एक छवि बनी हुई है और यदि हम जो कर रहे हैं उसके साथ ही साथ कुछ व्यापार भी कर लें तो हमारी छवि शायद वह न रहे जो कि अब है। किन्तु ऐसी कोई बात नहीं है, यह सिर्फ हमारा भ्रम है। और इसके बाद भी यदि लगता है कि मैं गलत कह रहा हूँ तो आप अपनी वर्तमान छवि को बनाये रखते हुये ब्लोगर में एक नये नाम से खाता खोल कर अन्य ब्लोग्स के जरिये आमदनी कर सकते हैं।
  • हमारी भाषाः सबसे बड़ी कठिनाइयों में से एक यह भी है कि वर्तमान में हिन्दी को इंटरनेट पूर्णतः सपोर्ट नहीं करता। इसी कारण से हमें एडसेंस की अच्छी खासी कमाई से वंचित रहना पड़ रहा है। खैर, इस दिशा में बहुत तेजी के साथ विकास हो रहा है और यह कठिनाई कुछ समय के बाद समाप्त हो जायेगी अतः इस मामले में हमें इंतिजार करना होगा। किन्तु हम अपने लेखों कुछ कुछ अंग्रेजी शब्दों का सहारा ले कर कुछ हद तक इस कठिनाई को दूर कर सकते हैं।

अब मैं सबसे बड़ी कठिनाई के विषय में चर्चा करूँगा

Vivek Rastogi said…

कल आपका लेख पढ़कर dgmpro का सदस्य बनने की कोशिश करी पर उन्होंने हमारे आवेदन को निरस्त कर दिया । अब क्या किया जाये ।

मैंने अपने कल के लेख में जिक्र किया था कि हमारे वर्तमान ब्लोग इंटरनेट मार्केटिंग के लिये विशेष उपयुक्त नहीं हैं। हमारे आवेदनों को स्वीकार अथवा निरस्त करने वालों के भी अपने मापदण्ड हैं और अपनी मजबूरियाँ हैं। आवेदन निरस्त होने का सबसे बड़ा कारण है हमारे ब्लोग्स का किसी एक निशे पर केन्द्रित न होना ट्रैफिक का बहुत कम होना। पर निराश होने की जरूरत नहीं है। हमें एक अच्छा सा निशे निश्चित कर के एक नया ब्लोग बनाना है और उसे लोकप्रिय बना कर ट्रैफिल लाने की व्यवस्था करनी है। इस प्रकार से कुछ समय के बाद आपका आवेदन अवश्य स्वीकृत हो जायेगा।
तो बन्धुओं, मुश्किलें बहुत सी हैं और “मुश्किलें होती हैं आसान बड़ी मुश्किल से”। पर हमें इन मुश्किलों आसान कर के ही दिखाना है।

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Posted on शुक्रवार, 27th मार्च 2009 by जी.के. अवधिया

आप लोगों ने मेरे कल के पोस्ट में अपनी प्रतिक्रियाएँ देकर मेरा उत्साहवर्धन किया इसके लिये आप सभी को धन्यवाद!

आज के अपने लेख में मैं कुछ और बातें बताने जा रहा हूँ जिससे कि स्पष्ट हो जाये कि इंटरनेट मार्केटिंग क्या चीज है और हिन्दी के उन ब्लोगरों को, जो वास्तव में ब्लोगिंग के जरिये कुछ आमदनी चाहते हैं, आर्थिक लाभ मिल सके। सबसे पहले मैं कल की टिप्पणियों को ध्यान में रख कर कुछ बातें कहना चाहूँगा।

नरेश सिह राठौङ said… इच्छा तो करती है लेकिन आशा नही है कि कमा पायेंगे । जानकारी बहुत अच्छी लगी । हिन्दी ब्लोग पर इसे गुप्त रखा जाता है । इसका ज्ञान तो बहुत से लोगो को है जो कमा भी रहे है लेकिन दूसरों के साथ शेयर करना नही चाहते है ।

Suresh Chiplunkar said…

नरेश जी की बात से सहमत हूँ कि ऐसे उपाय कई लोग अपना रहे हैं, लेकिन बताते किसी को नहीं हैं…

नरेश जी, आप बिल्कुल कमायेंगे पर आपको निराशा त्यागनी होगी। यह सही है कि इन बातों को न केवल हिन्दी वाले बल्कि अंग्रेजी वाले भी प्रायः गुप्त रखते हैं क्योंकि इन जानकारियों को वे ईपुस्तक का रूप देकर बेचते हैं। किन्तु मैं इन बातों को इसलिये बता रहा हूँ क्योंकि मैं चाहता हूँ कि कम से कम हिन्दी ब्लोगर्स को कुछ तो आर्थिक लाभ मिले। इन जानकारियों को प्राप्त करने के लिये मैंने पिछले पाँच वर्षों में अनेकों अंग्रेजी वेबसाइट्स, ब्लोग्स आदि की खाक छानी है और यह भी हो सकता है कि मैं भी आप लोगों को केवल उतनी ही जानकारी दूँ जिससे कि आपकी कमाई की शुरुवात हो जाये किन्तु बहुत सी गूढ़ बातों को, जिनसे कि आमदनी बढ़ती जाये, मैं भी बाद में बेचने का प्रयास करूँ।

Suresh Chiplunkar said… वैसे एक बात बताना चाहूँगा कि दो साल से ऊपर हो गये ब्लॉग लिखते 300 से ऊपर बड़ी-बड़ी पोस्ट लिख मारी, एक पैसे की कमाई नहीं हुई आज तक, उलटा दो-चार लेख “भाई” लोग फ़ोकट में उठा ले गये ब्लॉग से… :(

सुरेश जी, मैं आपके लेखों को पढ़ते रहता हूँ और आपका बहुत बड़ा प्रशंसक भी हूँ। आपकी बेबाक शैली मुझे बहुत अच्छी लगती है। किन्तु मैं आपको यह बताना चाहता हूँ कि आपके वर्तमान लेखों से नाम तो कमाया जा सकता है, धन नहीं। धन कमाने के लिये आपको कुछ अलग प्रकार के लेख लिखने होंगे। मेरे आज के पोस्ट को पढ़ने के बाद स्पष्ट हो जायेगा कि आपको किस प्रकार के लेख लिखने हैं।

ज्ञानदत्त पाण्डेय | G.D.Pandey said… काम की बात बताई अवधिया जी। एडसेंस का फाइन प्रिण्ट ध्यान से नहीं पढ़ा। कहीं इन साइट्स का विज्ञापन उसके साथ करार का उल्लंघन तो नहीं?

ज्ञानदत्त जी, मैंने आपकी शंका का समाधान कल अपनी टिप्पणी और फूटनोट में कर दिया था पर हो सकता है कि बाद में जोड़े जाने के कारण बहुत से लोगों ने उसे न पढ़ा हो। इसलिये मैं यहाँ पर उसे दुहरा रहा हूँ:

इन विज्ञापनों से एडसेंस के किसी नियम का उल्लंघन नहीं होता। आप इन्हें बेझिझक एडसेंस के साथ प्रकाशित कर सकते हैं।

लवली कुमारी / Lovely kumari said… काफी लम्बा प्रोसेस है पर देखूंगी कर के वक्त मिलते ही.जानकारी का धन्यवाद.

अल्पना वर्मा said…

bahut kaam ki jaankari hai.
thoda comlicated sa lag raha hai process…

mamta said…

पर अभी पूरा समझने मे हमें थोड़ा समय लगेगा ।

लवली कुमारी जी, वास्तव में कुछ अधिक लम्बा प्रोसेस नहीं है, पहली बार किसी काम को करने पर कठिन और लम्बा लगता है। और फिर रजिस्ट्रेशन तो केवल एक बार कराना है जिसमें अधिक समय लगेगा बाद में तो मात्र मिनट का काम है।

अल्पना जी, कुछ भी काम्प्लीकेटेड नहीं है, एक बार करके तो देखिये पर मेरे आज के पोस्ट को पढ़ लेने के बाद।

ममता जी, बहुत आसान है, यदि फिर भी कुछ शंका हो तो आप, और अन्य ब्लोगर साथी भी, बेहिचक मुझे पते पर ईमेल कर सकते हैं। जहाँ तक हो सकेगा मैं व्यक्तिगत रूप से सभी शंकाओं का समाधान करने का प्रयास करूँगा।

दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi said…

यह सब करने पर कुछ बखेड़ा सा लग रहा है।

दिनेशराय जी, विश्वास कीजिये कि कुछ भी बखेड़ा नहीं है, बहुत आसान है। और हाँ आपके अंग्रेजी ब्लोग Law & Life से तो अच्छी कमाई के अवसर हैं। आप अपने विधि विषयक ज्ञान को ईपुस्तक बना कर आसानी के साथ बेच सकते हैं।

PD said… ham bas itna hi kahenge ki ham Yatra.com se hi apni har flight book karte hain.. apne blog par uska link laga den to agli bar ham yahin se vahan jakar ticket book kar liya karenge.. kam se kam apne kisi blog bhai ka fayda to ho jayega.. :)

धन्यवाद प्रशांत! मैंने इस ब्लोग में यात्रा.कॉम का बैनर लगा दिया है।

अन्य सभी टिप्पणीकारों को मेरा हार्दिक धन्यवाद!

हाँ तो अब हम आज के अपने विषय पर आते हैं। सबसे पहले तो यह जान लें कि इंटरनेट मार्केटिंग क्या है। संक्षेप में कहा जाये तो

अपने या किसी अन्य उत्पादक के उत्पादों को बेचने के लिये उन्हें इंटरनेट के असंख्य प्रयोगकर्ताओं के समक्ष अपने वेबसाइट ब्लोग के द्वारा प्रस्तुत करने को इंटरनेट मार्केटिंग कहा जाता है अर्थात् ऐसा व्यापार जिसे कि इंटरनेट के जरिये किया जाये। इंटरनेट व्यापार में आपका वेबसाइट ब्लोग, जो कि विश्व भर के लाखों करोड़ों लोगों की आसान पहुँच में होता है, आपकी दूकान के रूप में परिवर्तित हो जाता है।

अब मैं आप लोगों को यह बता दूँ कि वर्तमान में जो हमारे हिन्दी ब्लोग्स हैं वे इंटरनेट मार्केटिंग के लिये विशेष उपयुक्त नहीं हैं क्योंकि उनमें निहित सामग्री अनेकों प्रकार के हैं और इंटरनेट मार्केटिंग के लिये इंटरनेट मार्केटिंग के लिये ऐसे ब्लोग की आवश्यकता होती है जो कि किसी एक ऐसे विषय पर केन्द्रित हो जिससे कि सम्बन्धित उत्पाद को बेच कर आमदनी प्राप्त किया जा सके। ऐसे विषय को अंग्रेजी में निशे (निचे) कहा जाता है।

तो मेरा सुझाव है कि आप लोग अपने वर्तमान ब्लोग्स में अपने उत्पाद से सम्बन्धित बैनर्स आदि तो लगा दें किन्तु उनसे विशेष आमदनी की उम्मीद न रखें। आपकी विशेष कमाई कैसे होगी यह मैं आगे बताने जा रहा हूँ।

सबसे पहले तो, जैसा कि मैंने कल भी कहा था, डीजीएम.प्रो का मुफ्त सदस्य बन जायें। रजिस्ट्रेशन के लिये यहाँ क्लिक करें। (यहाँ पर यह मत समझ लीजियेगा कि मैं अपना कोई रीफरल लिंक दे रहा हूँ जिससे कि मुझे कुछ अतिरिक्त आय हो सके।)

अब वहाँ उपलब्ध उत्पादों में उन उत्पादों का चयन करें जिनके विषय में आप कुछ अच्छे लेख लिख सकते हैं। उन उत्पादों के कैम्पेन ज्वॉयन करने के लिये क्लिक कर दें और इंतजार करें। दो तीन दिनों में ही आपको ईमेल आ जायेगा कि आपका आवेदन स्वीकार हुआ या निरस्त हो गया। वैसे निरस्त होने के अवसर बहुत कम हैं।

अब मान लीजिये कि नौकरी.कॉम को आपको प्रमोट करना है। तो सबसे पहले आप एक नया ब्लोग बनायें जो कि नौकरी, आजीविका आदि से सम्बन्धित हो। उसका नाम भी आप नौकरी, आजिविका, साक्षात्कार जैसा कुछ दे सकते हैं। अब आपको अपने इस ब्लोग में नौकरी से सम्बन्धित लेख डालते जाना है जैसे कि “नौकरी के लिये आवेदन कैसे करें”, “रिज्यूम कैसे लिखें”, “प्रभावशाली रिज्यूम”, “साक्षात्कार कैसे दें” आदि आदि। आप यदि सोचेंगे तो आपको बहुत सारे लेखों के लिये शीर्षक मिल जायेंगे। हाँ अपने उस ब्लोग के साइड बार आदि में नौकरी.कॉम के बैनर्स अवश्य लगायें और अपने प्रत्येक लेख में उचित स्थानों पर अपना एफिलियेट लिंक देना भी कदापि न भूलें। लेख के बीच में कुछ अंग्रेजी शब्दों का प्रयोग अवश्य करें जैसे कि “साक्षात्कार (interview)”। इससे आपका ब्लोग सर्च इंजिन्स को आकर्षित करेगा।

इस सिलसिले को मैं जारी रखूँगा और बताउँगा कि कैसे जल्दी से जल्दी आपके ब्लोग के विषय में लोग जानेंगे, कैसे वह लोकप्रिय होगा, कैसे उससे आमदनी होनी शुरू होगी आदि।

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Posted on शुक्रवार, 13th फरवरी 2009 by जी.के. अवधिया

नेट से कमाई के क्या तरीके हैं?

नेट से कमाई के बहुत सारे तरीके हैं जैसे कि पेड सर्व्हे से कमाई करना, गूगल तथा अन्य एडनेटवर्क्स के PPC विज्ञापनों से कमाई करना, एफिलियेट प्रोग्राम्स से कमाई करना, ई पुस्तक और लेख लिखकर उन्हें बेचकर कमाई करना, आनलाइन व्यापार करके कमाई करना, बड़ी बड़ी कंपनियों को अपने वेबसाइट या ब्लोग में एड स्पेस बेच कर कमाई करना आदि।

पेड सर्व्हे से कमाई करना

पेड सर्व्हे क्या होता है?

यह तो आप जानते ही हैं कि जहाँ सोनी टी व्ही बेचता है वहीं पेनासोनिक भी टी व्ही बेचता है। IBM कम्प्यूटर बनाता है तो जेनिथ का उत्पाद भी कम्प्यूटर ही है। रिलायंस, आइडिया, टाटा इंडिकाम आदि सभी बड़ी कंपनियाँ मोबाइल सेवा बेचती हैं। ऐसी सभी बड़ी कंपनियाँ चाहती हैं कि उनके उत्पाद अधिक से अधिक बिके। अपना उत्पाद बेचने के लिये बहुत बड़ी होड़ लगी हुई है उनके बीच।

अब अधिक मात्रा में वही उत्पाद बिकेगा जिसे ग्राहक अधिक पसंद करेगा और ग्राहक उसे ही अधिक पसंद करेगा जिसकी गुणवत्ता अधिक हो। सारी बड़ी कंपनियाँ जानना चाहती हैं कि लोग, अर्थात् उनके ग्राहक, किसी उत्पाद को क्यों अधिक पसंद करते हैं ताकि अपने उत्पाद को और भी अधिक गुणवत्ता वाली बनाया जा सके। इस जानकारी के लिये उन्हें लोगों की राय की आवश्यकता होती है जो कि उन्हें सर्व्हे कंपनियाँ उचित मूल्य ले कर प्रदान करती हैं। इन सर्व्हे कंपनियाँ अपनी ग्राहक कंपनी और उसके प्रतिस्पर्धी कंपनियों के उत्पाद को ध्यान में रख कर एक प्रश्नावली बनाते हैं और प्रश्नावली के प्रश्नों का उत्तर आम लोगों से जानना चाहते हैं। आम लोगों के द्वारा दिये गये उत्तरों का विश्लेषण करके उन सर्व्हे कंपनियों को जानकारी मिल जाती है कि लोग किस उत्पाद को कितना और क्यों पसंद करते हैं। वे अपना रिपोर्ट बना कर अपनी ग्राहक कंपनी को दे देते हैं ताकि ग्राहक कंपनी लोगों की पसंद को ध्यान में रखकर अधिक गुणवत्ता वाले उत्पादों का निर्माण कर सकें। तो ऐसी सर्व्हे कंपनियाँ सर्व्हे करने वाले अपने सदस्यों को उनकी राय की कीमत देती हैं इसीलिये इन सर्व्हे को पेड सर्व्हे कहा जाता है। अमेरिका में तो व्यापारियों में इतनी अधिक होड़ है कि लोगों को उनकी राय के एवज में अच्छे अच्छे उत्पाद तक मुफ्त में मिल जाते हैं।

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गोडैडी कूपन्स परिचय